Author: ज्ञानेन्द्र प्रकाश

स्त्री-वर्ग के सपनों की लगाम भला पुरुष के हाँथों में क्यों हो?स्त्री-वर्ग के सपनों की लगाम भला पुरुष के हाँथों में क्यों हो?

आदिम युग से आज तक कालक्रम का विकास इस कटु-सत्य को प्रतिबिंबित करता है कि, भारतीय समाज में स्त्री-वर्ग एक[...]

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स्त्री को गृहणी तक सीमित कर देना असीम संभावनाओं का गला घोंटने जैसा हैस्त्री को गृहणी तक सीमित कर देना असीम संभावनाओं का गला घोंटने जैसा है

आपके कार्य को यश मिला…वाह!यशस्वी महिमामंडन ने ही आपको भ्रमित किया, घर के काम के बोझ तले आपका-अपना व्यक्तित्व गौण[...]

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धन्य हैं वे लोग जो धर्म एवं न्याय के खातिर आवाज बुलंद करते हैंधन्य हैं वे लोग जो धर्म एवं न्याय के खातिर आवाज बुलंद करते हैं

धन्य हैं वे लोग,जो धर्म (कर्तव्य) एवं न्याय के खातिर आवाज बुलंद करते हैं, विषम परिस्थितियों में भी सत्य के[...]

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क्या भारतीय लोकतंत्र में संवाद हाशिए पर जा रहा है?क्या भारतीय लोकतंत्र में संवाद हाशिए पर जा रहा है?

वैचारिक प्रवाह थमता हुआ नजर आ रहा, संवाद हाशिए पर जा रहा है, असहमति की लेखनी कम्पायमान हो रही है…यह[...]

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प्रश्न करना चेतना का प्रमाण है लेकिन इस चेतना पर पहरा क्यों ?प्रश्न करना चेतना का प्रमाण है लेकिन इस चेतना पर पहरा क्यों ?

प्रश्न करना चेतना का प्रमाण है “तुम प्रश्न बहुत पूछते हो, बात-बात में चल दिए आलोचना करने, ऐसे में देश[...]

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