तू कर फिर से नई शुरुआत


तू कर फिर से नई शुरुआत

मंजिलों की उलझनों को सुलझाकर
यादों की अड़चनों को बहाकर
एक नई नाव पकड़, कर आज ये समंदर पार
तू कर फिर से नई शुरुआत


ये दुख का बवंडर भी चला जाएगा
बवंडर साथ तेरी हिम्मत न ले जा पाएगा
हो गई नई सुबह, उम्मीदों के सूरज की
बस आगे बढ़, तुझे कोई ना हरा पाएगा


लोग आएंगे-जाएंगे पर तू खड़ा रह
आंधी हो या तूफान बस तू डटा रह
तू जाने बस तेरी आग, तू यहाँ ठहर
चल उठ, कर फिर से नई शुरुआत


तू मेहनत कर कुछ बनकर दिखा
तू है क्या, कुछ करके दिखा
खुद से लड़, उभरकर आगे बढ़
कर तू फिर से नई शुरुआत


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2 thoughts on “तू कर फिर से नई शुरुआत”

  1. Anushka singh says:

    Kabhi rukna nai kisi ke liye
    kabhi jhukna ni izzat ke liye
    Tu har dariya par kar jayegi ye dost humesha tujhe yaad aayegi
    I am always there for you bro ❤

    1. Yogita Dabhade says:

      Thank you Anushka ❤️😌

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