किसानों की दुर्दशा


किसानों की दुर्दशा

कृषि प्रधान भारत की
जो ताकत है किसान
वो योजनाओं का मात्र
हिस्सा बनकर रह गया


चिप्स-आटा बेचकर
इमारतें खड़ी कर ली लोगों ने
वो अनाज उगाने वाला
मिट्टी में दबकर रह गया


उसकी आत्महत्या का मुद्दा
उछला खूब राजनीति में, लेकिन
वह राजनीति की गलियों का
किस्सा बन कर रह गया


सब की भूख मिटाने वाला
खुद भूखा रह गया है

वह भारत में अब यारों, सिर्फ
किसान बनकर रह गया है


किसानों की दुर्दशा =>image credit:- Theqoint.com

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